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कोरोना कोरोनिल और आयुर्वेद (प्रकाशित आलेख )      अंतरराष्ट्रीय दवा कंपनियों एवं धनलोलुप चिकित्सकों की एक बड़ी लॉबी विश्वस्तर पर सक्रिय है | शासकीय अस्पतालों में कौन-सी दवाओं को प्रयोग में लाया जाएगा, किस देश में कौन-सी   दवाओं पर प्रतिबन्ध होगा आदि निर्णयों को प्रभावित करने के लिए बड़े स्तर पर षड्यंत्र रचे जाते हैं | पिछले वर्ष अमेरिका में 20-22 दवा कंपनियों पर लगभग सौ दवाओं की कीमतों में एक हजार प्रतिशत की बढ़ोतरी करने के लिए षड्यंत्र रचाने के आरोप में परिवाद प्रस्तुत   किया गया है | इनमें भारत की सात कंपनियों के भी नाम हैं | अनुचित व्यापर करने की अपराधी ये कम्पनियाँ यदि अमेरिका तक को चूना लगा देती हैं तो भारत में ये किस हद तक   अनुचित ठगी करती होंगी, कल्पना की जा सकती है | पता नहीं क्यों हमारे देश में फार्मास्युटिकल कम्पनियों के घोटाले या अनैतिक डील पर कोई बड़ा विरोध या आन्दोलन अभी तक सुनने में नहीं आया | स्वतंत्र पत्रकार श्री आलोक तोमर (स्व.) जब कैंसर से जूझ रहे थे तब उन्होंने उपचार के नाम पर होने वाली इस खुली-लूट की चर्चा अपने   कुछ आलेखों में की थी | भारत में असाध्य रोग पीड़ित
          स्वतंत्रता सेनानियों के प्रेरणास्रोत ताना जी मालसुरे                    #ताना जी मालसरे काँग्रेस शासित राज्यों में फ़िल्म तानाजी को टैक्स फ्री करने की मांग हो रही है | काँग्रेस शासित ही क्यों सभी राज्यों में एसी फिल्मों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए | स्कूल कॉलेज के विद्यार्थियों को तो संस्था या शासन की ओर से   इसे निशुल्क दिखाने का भी प्रवंध किया जाना चाहिए | एसी फ़िल्में मानसिक गुलामी से आजादी देती हैं | एसा कहा जाता है कि 1918 में जब पोलैंड स्वतंत्र हुआ तो पोलैंडवासियों   राजधानी के मुख्य चौराहे पर रूसी शासकों द्वारं निर्मित चर्च को ढहा दिया | और वहां एक नवीन चर्च का निर्माण किया | जब उनसे पूछा गया कि चर्च ही बनाना था तो पुराने को क्यों तोड़ा | उत्तर मिला पुराना चर्च रूस की गुलामी का प्रतीक था नया चर्च हमारे स्वाभिमान व स्वतंत्रता का द्योतक है | संसार में संभवतः सभी देशों ने अपनी अपनी संकृति,सभ्यता व महापुरुषों को आने वाली पीढी के सामने ससम्मान प्रस्तुत किया | किन्तु हम एक मात्र एसे देश हैं जहाँ राष्ट्र नायक कौन हैं और खलनायक कौन अभी भी तय नहीं हो पाया है | कुछ लोग ओक्सफ
तबलीगी मरकज के संक्रमित कोरोना बम                          (प्रकाशित आलेख )    इतिहास में जब भी चीनी वायरस कोरोना से हुए नरसंहार   को लिखा   जाएगा तब उसमें यह उल्लेख भी करना पड़ेगा कि तबलीगी जमात ने अपनी अघोषित जिहाद से भारत सहित विश्व के अनेक देशों को इस महाप्रलय के सन्निकट पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी | जब मानव सभ्यता को बचाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को एक मात्र युक्ति माना   गया तब तबलीगी जमात ने इसे अस्वीकार कर अनेक देशों में इज्तिमा (इकठ्ठा होना/एकत्रित होना) आयोजित किये | जमात ने फरवरी माह में मलेशिया में विभिन्न देशों के लगभग   सोलह हजार लोगों को एकत्रित किया परिणामस्वरूप वहाँ कोरोना संक्रमण में तेजी से वृद्धि हुई | इसी क्रम में   बारह मार्च 2020 को   तबलीगी उलेमाओं ने लगभग ढाई लाख मुसलमानों का   इज्तिमा (इकठ्ठा करना) किया जिसके भयानक परिणाम पाकिस्तानी जनता भुगत रही है | स्मरण रहे कट्टर पंथी/आतंकी समूह इस्लामिक देशों में भी फिदाइन हमले करवाते हैं वहां युद्ध/जिहाद   उदार मुसलमानों या भिन्न फिरकों के विरुद्ध है उन्हें तो काफिरों से भी बड़ा शत्रु माना जाता है |      तबल
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डॉ.रामकिशोर उपाध्याय ,Dr.Ramkishor Upadhyay images

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                                                     ओज कवि रामकिशोर उपाध्याय                                                                    राम किशोर उपाध्याय अखिल भारतीय कविसम्मेलन                                                            bramkishore upadhyay gwalior 

राम किशोर उपाध्याय ,ओबेसी को जबाब देती कविता Ram kishor Upadhyay

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